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हमारे जेनेटिक काउंसलर आपको बताएंगे कि कैसे हमारे टेस्ट से आपका स्वास्थ्य और जीवनशैली बेहतर हो सकती है.

सैंपल कलेक्शन किट एक बकल स्वैब है, जिसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है. किट में किस तरह सैंपल लेना है, इसका प्रिंटेड निर्देश दिया होता है. निर्देशों का पालन करके सैंपल कलेक्ट करने के बाद, आपको बस हमें सूचित करना है और हम इसे प्रोसेसिंग के लिए पिक कर लेंगे.
हां, हम हमारे पर्सनल जीनोमिक्स प्रोडक्ट के लिए ब्लड सैंपल प्रोसेस कर सकते हैं. हालांकि, हमारे अधिकांश क्लाइंट बकल स्वैब किट का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं क्योंकि ये दर्दरहित होती है और इसे आसानी से शिप किया जा सकता है. दोनों प्रकार के सैंपल एनालिसिस के लिए अच्छे तरीके से काम करते हैं, बशर्ते कलेक्ट किया गया सैंपल पर्याप्त हो. बकल स्वैब किट के भीतर दिए गए निर्देशों के अनुसार सबमिट करना होता है. ब्लड सैंपल के लिए कम से कम 2-3 ml ब्लड निकालना पड़ता है. अगर जमा किया गया नमूना पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो इस बारे में क्लाइंट को जल्द से जल्द सूचित कर दिया जाता है.
सैंपल प्रोसेसिंग की प्रक्रिया हमारी भारत की लैबोरेटरी में की जाती है, जो हमेशा चालू रहती है. हमने उन कर्मचारी को प्रशिक्षित किया है, जो विशेष रूप से मैपमायजीनोम और इसके प्रोडक्ट के लिए काम करते हैं.
हां यह संभव है. सैंपल को कलेक्ट करने के बाद, इसे एक खास तापमान में स्टोर किया जा सकता है और इसके लिए विशेष पैकेजिंग की आवश्यकता नहीं होती है. यह जांच कर लें कि ट्यूब की लिड को कस कर लगाया गया है, ताकि स्वैब सूखे न.
प्रक्रिया में कई चरण होते हैं
  • बकल स्वैब सैम्पल के लिए प्लॉसिबिलिटी चेक
  • डीएनए एक्सट्रेक्शन और क्वालिटी चेक
  • जीनोटाइपिंग (जो आपके DNA कोड पढ़ने की प्रक्रिया है) और डेटा जेनरेशन
  • डेटा रिव्यू और क्वालिटी चेक
  • एनालिसिस और रिपोर्ट
  • जेनेटिक परामर्श और व्यक्तिगत सिफारिश/कार्य योजना
हम आपके जेनेटिक डेटा को आपके DNA में उपस्थित "मार्कर्स" के लिए स्क्रीन करते हैं - जो सिंगल लेटर वैरिएंट होते हैं - आपके जीवनशैली से जुडी बीमारियों के खतरे के लिए, लक्षणों की पूर्व सूचना, ड्रग रिस्पोंस, आदि के लिए. हमने एक मज़बूत एल्गोरिथम बनाया है जो आपके DNA में मौजूद जेनेटिक मार्कर्स के आधार पर, एनालिसिस के लिए उपयोग होता है.
इन सिंगल लेटर वेरिएशन को सिंगल न्यूक्लीओटाइड पॉलीमोरफिस्म या SNP कहा जाता है.
हम कठोर मापदंडों द्वारा SNP के पैनल का चयन करते हैं. हम केवल उन्हीं SNPs को स्वीकार करते हैं जिनका किसी विशेष कंडीशन के साथ प्रमाणित संबंध है, जिन्हें बहुत सी केस-कंट्रोल स्टडीज में रेप्लिकेट किया जा चुका है और जिनमें बहुत सी जातियां शामिल हों. हम उपलब्ध होने पर और हमारे चयन मानकों पर खरा उतरने पर भारतीय विशिष्ट डेटा भी शामिल करते हैं. हम अपनी रिसर्च के माध्यम से 'इंडिया स्पेसिफिक कंडीशन एसोसिएटेड बायोमार्कर डेटाबेस' बनाने के लिए भी प्रयासरत हैं, जो हमारी सर्विसेज की बदौलत लगातार विकसित हो रहा है.
हमने, बायोइन्फॉर्मेटिक्स में हमारे 20 वर्ष से अधिक के अनुभव का उपयोग करके और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल तथा साइंटिफिक लिटरेचर से डेटा क्यूरेट करके एक डेटाबेस बनाया है. इस डेटाबेस में एक ओर जहां हमने रिपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए अधिकतम कंडीशन्स को शामिल किया है, वहीं उन मार्कर्स का खास तौर पर ध्यान रखा गया है जो भारतीय लोगों के लिए उपयुक्त और प्रमाणित हैं, जैसे कि टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, क्लोपिडोग्रिल के प्रति प्रतिक्रिया इत्यादि.
जेनेटिक मटेरियल में विविधता या म्यूटेशन की संभावना बहुत कम होती है तथा इन्हें विकसित होने में सालों का समय लगता है. एक बार जब किसी मार्कर के लिए आपकी स्क्रीनिंग कर ली जाती है, तो इसके बाद लंबी अवधि में अगर कोई गंभीर एनवायर्नमेंटल परिवर्तन हुआ हो, या आपके काम-काज/लाइफस्टाइल में कोई बहुत ही हानिकारक तथा व्यापक परिवर्तन आया हो, तो उसी स्थिति में ही आपको दोबारा सैंपल देना पड़ता है तथा दोबारा विश्लेषण किया जाता है. अन्यथा, जीनोटाइप में बदलाव की संभावनाएं बहुत कम होती है.
आपकी रिपोर्ट को वर्तमान रिसर्च और दुनिया भर में रजिस्टर हुए डेटाबेस के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है. एक बार साइन-अप कर लेने के बाद, जब भी डेटाबेस में कोई नई कंडीशन जोड़ी जाती है, या इसे किसी दूसरे डेटाबेस में अपग्रेड किया जाता है तो, आपको पूरे साल फ्री अपडेट प्राप्त होते हैं. इसके लिए ताजा सैंपल देने की आवश्यकता नहीं होती है.
अगर आपको पहले से ही किसी बीमारी के होने की अधिक संभावना है या किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, तो आप किसी दवा के प्रति आपके शरीर में होने वाली विषाक्तता और दवा के टोलरेंस को आसानी से समझ सकते हैं, यह आपकी वर्तमान में चल रही थेरेपी को भी प्रभावित करता है. आपकी रिपोर्ट कुछ बीमारियों के लिए आपकी कैरियर स्टेटस को दर्शाती है जिससे आपके बच्चों में उन बीमारियों के होने की संभावनाओं का पता चलता है.
नहीं, हाई जेनेटिक रिस्क होने का अर्थ यह नहीं है कि आपको यह बीमारी निश्चित तौर पर होगी. किसी भी बीमारी को चिकित्सकीय रूप से प्रकट होने के लिए बहुत से अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं जिनमें फैमिली हिस्ट्री, लाइफस्टाइल, क्लिनिकल हिस्ट्री और एनवायरमेंटल फैक्टर्स के संपर्क में आना आदि शामिल है.
हम इस क्षेत्र में कई पेटेंट रखने वाली कंपनी ओसिमम बायोसोल्यूशन की सर्विसेज का उपयोग करते हैं. यह लैब ISO और NABL द्वारा प्रमाणित है. हमारे लैब में CE-सर्टिफाइड प्रोडक्ट भी हैं.
हां, मैपमायजीनोम ऑसिमम बायोसॉल्यूशन्स की सेवाओं का उपयोग करता है. ऑसिमम बायोसॉल्यूशन्स के पास ISO 9001:2010 और ISO 13485:2012 सर्टिफिकेशन है. यह लैब ISO और NABL द्वारा प्रमाणित है. हमारे लैब में CE-सर्टिफाइड प्रोडक्ट भी हैं.
माइटोकॉन्ड्रियल और Y DNA सीक्वेंस को जीनोटाइप करके पूर्वजता की जानकारी तैयार की जाती है. चूंकि अधिकतर जेनेटिक मार्कर के लिए एक निश्चित स्तर की सटीकता आवश्यक होती है, इसलिए वर्तमान में हम यह सर्विस केवल हमारे होल जीनोम सीक्वेंसिंग (WGS) कस्टमर्स को ही प्रदान कर रहे हैं.
सबसे जरूरी बात सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण मार्कर का उपयोग सुनिश्चित करना है. इससे हमारी क्वालिटी कट-ऑफ क्राइटीरिया पर खरे न उतरने वाले म्यूटेशन जैसे कि स्टडी का आकार, P-वैल्यू, ऑड रेशियो इत्यादि हटा दिए जाते हैं. स्टडी को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए, हम इन मानदंडों पर नजर रखते हुए यह सुनिश्चित करते हैं कि ये बीमारी के साथ सही को-रिलेशन में हो.
मैपमायजीनोम ने बहुत से ट्रेडमार्क फाइल किए हैं और हमारे पास हमारे खुद के द्वारा निर्मित रिस्क असेसमेंट एल्गोरिथम - “SNaPpy” का पेटेंट भी है. मैपमायजीनोम और इसकी पेरेंट कंपनी ओसिमम बायोसोल्यूशन के पास, संयुक्त रूप से 60 से अधिक पेटेंट हैं (1 अक्टूबर 2019 के आंकड़ों के अनुसार).
हां, पूरी तरह! मैपमायजीनोम पर रजिस्टर्ड प्रत्येक सैंपल को लैब में भेजने से पहले, उससे संबंधित निजी जानकारी को हटा दिया जाता है. हम लैब प्रोसेसिंग, डेटा विश्लेषण और रिपोर्ट जनरेशन के लिए एक सुरक्षित LIMS का उपयोग करते हैं. प्रक्रिया के सभी चरणों पर, क्लाइंट की जानकारी और उनके डेटा को प्रतिबंधित एक्सेस और समान प्रोटोकॉल द्वारा सुरक्षित रखा जाता है.
जब आप मैपमायजीनोम पर रजिस्टर करते हैं (पहली बार) , तो आपसे आपके DNA सैंपल (और डेटा) को रिसर्च के लिए इस्तेमाल करने की सहमति मांगी जाती है. अगर आप नहीं चाहते कि हम आपका डेटा इस्तेमाल करें, तो आप सहमति फॉर्म में दिया गया "ऑप्ट-आउट" का विकल्प चुन सकते हैं.