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"अगर हम खुद को मानवता की सेवा में समर्पित नहीं करेंगे तो दूसरा कौन करेगा??"
जॉन ऐडम्स

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जेनेटिक काउंसलिंग क्या है?


जेनेटिक काउंसलिंग मेडिसिन की एक विशेष शाखा है, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों, कपल और परिवारों को विशिष्ट स्वास्थ्य समस्याओं में जेनेटिक कॉन्ट्रिब्यूशन के मेडिकल, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक और रिप्रोडक्शन में होने वाली समस्याओं को समझने और उनके अनुकूल बनने में मदद करना है.

नवजात शिशु में जेनेटिक डिसऑर्डर का संदेह, कैंसर की फैमिली हिस्ट्री, डाउन सिंड्रोम के लिए पैटर्नल जेनेटिक स्क्रीन से सकारात्मक परिणाम, ऑटिज्म से ग्रसित पाया गया बच्चा- ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें समझने और पहचानने में जटिल जानकारी वाले और विरोधी भावनाओं वाले मरीज़ों का पता चलता है. ये और साथ ही अन्य परिस्थितियों में अक्सर मुश्किल फैसला लेना पड़ता है, जिसमें कई तकनीकी, नैतिक और अत्यधिक व्यक्तिगत प्रश्न शामिल होते हैं. जेनेटिक काउंसलिंग क्लिनिकल सेटिंग के भीतर विशेष सेवाएं प्रदान करके इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है.

जेनेटिक काउंसलर व्यक्तियों को ऐसी परिस्थितियों में उत्पन्न होने वाले वैज्ञानिक और भावनात्मक समस्याओं का समाधान करने में मदद करते हैं और सक्रिय रूप से उन्हें अपनी खुद की वैल्यू और व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर सूचित निर्णय लेने में मदद करते हैं.

जेनेटिक काउंसलिंग में क्या-क्या शामिल है?


जोखिम मूल्यांकन

बीमारी के होने या दोबारा होने की संभावनाओं के आंकलन के लिए परिवार और उनकी मेडिकल हिस्ट्री का अध्ययन

एजुकेशन

कंडीशन की नेचुरल हिस्ट्री, आनुवांशिकता पैटर्न, टेस्टिंग, मैनेजमेंट, प्रिवेंशन, सपोर्ट रिसोर्स और रिसर्च के बारे में

सूचित विकल्प

जोखिम मूल्यांकन, परिवार लक्ष्य, एथिकल और धार्मिक मूल्यों के दृष्टिकोण में सूचित विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए काउंसलिंग

सपोर्टिव काउंसलिंग

प्रभावित परिवार के किसी सदस्य और/या उस डिसऑर्डर के वापस होने की अधिक रिस्क वाले लोगों में, डिसऑर्डर के एडजस्टमेंट के लिए सर्वोत्तम संभव सहायता को प्रोत्साहित करना

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए तैयारी किस प्रकार से करें?


जेनेटिक काउंसलिंग अपॉइंटमेंट, आपके सामान्य डॉक्टर के अपॉइंटमेंट की तुलना में बहुत अलग होते हैं. ये आमतौर पर 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक चलते हैं, और इन्हें इस प्रकार से डिज़ाइन किया जाता है कि इस दौरान आपको प्रश्न पूछने के भरपूर अवसर मिले, आप अपनी चिंताओं/भय के बारे में पूछ सकें और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकें. अगर आप जेनेटिक काउंसलिंग के अपॉइंटमेंट से पहले अपनी फैमिली हिस्ट्री के बारे में अधिकतम जानकारी प्राप्त कर लें तो आपको इन अपॉइंटमेंट का अधिक लाभ मिल सकता है. सहायक जानकारियों में निम्न शामिल है:

मेडिकल रिकॉर्ड

इसमें डॉक्टर की टिप्पणी और पैथोलॉजी रिपोर्ट शामिल हैं. ये क्लिनिकल डाइग्नोसिस को कंफर्म करने या किसी संदिग्ध डाइग्नोसिस की संभावना को रूल-आउट करने के लिए महत्वपूर्ण हैं. जेनेटिक असेसमेंट और/या टेस्टिंग के लिए गाइड करने में आपके मेडिकल रिकॉर्ड बहुत महत्वपूर्ण होते हैं.

परिवार के सदस्य और उनका स्वास्थ्य

इसमें हर व्यक्ति की वर्तमान आयु या डाइग्नोसिस या मृत्यु के समय आयु शामिल होती है, इसके अलावा इसमें मृत्यु का कारण भी लिखा जाता है. इस सूची में केवल ब्लड रिलेटिव (माता-पिता, भाई, बच्चों, चाचा, चाची, भतीजे, भतीजियों, दादा-दादी और चचेरे भाई-बहनों) को शामिल किया जाना चाहिए.

परिवार में प्रमुख बीमारियां

किसी भी प्रकार के कैंसर, हृदय रोग, मानसिक बीमारी, ज्ञात जेनेटिक कंडीशन, बर्थ डिफेक्ट, मानसिक रिटार्डेशन, शिशु की/अचानक मृत्यु, किसी भी गर्भपात या फर्टिलिटी से संबंधित समस्या पर नजर रखें. अपने अपॉइंटमेंट से पहले हेल्थ हिस्ट्री प्रश्नावली भरना न भूलें.

हालांकि फैमिली हिस्ट्री की जानकारी होने से हमें काफी मदद मिलती है, लेकिन अगर आपको अपनी फैमिली हिस्ट्री की जानकारी नहीं है तो भी आपको चिंतित नहीं होना चाहिए और अपना अपॉइंटमेंट अटेंड करना चाहिए. हमारे जेनेटिक काउंसलर आपके पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर आपके मामले पर विचार करेंगे और आपको रिस्क, उपलब्ध टेस्टिंग विकल्प तथा आपके और आपके परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे.

जेनेटिक काउंसलिंग कब करवाएं?


यह उन स्वस्थ व्यक्तियों के लिए उपयुक्त है जो डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य बहुकारकीय कंडीशन्स के प्रति अपने जेनेटिक प्रीडिस्पोजीशन को समझना चाहते हैं.

  • फैमिली हिस्ट्री में आमतौर पर परिवार के बुजुर्ग सदस्यों में हुए टाइप 2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन, डिसलिपिडेमिया, स्पोरेडिक (वन-ऑफ), कैंसर के मामले आदि शामिल होते हैं.
  • जीनोमपत्री जेनेटिक काउंसलिंग का उद्देश्य लोगों को यह समझने में मदद करना है कि भविष्य में उनके शरीर में विभिन्न कारकों पर आधारित कंडीशन और बीमारियों की आशंका के बारे में उनके DNA में क्या जानकारियां छिपी हैं
  • जीनोमपत्री जेनेटिक काउंसलिंग का उद्देश्य है:
    • जागरूकता के माध्यम से सक्रियता पैदा करने के उद्देश्य के लिए रिस्क कंडीशन के लक्षणों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं
    • रिस्क को कम करने के लिए, डाइट और लाइफस्टाइल आधारित रणनीतियों को शामिल करते हुए, एक प्रिवेंशन आधारित प्लान निर्मित करते हैं
    • लाइफ-सेविंग अर्ली इंटरवेंशन और समय पर उपचार को संभव बनाने के लिए, टार्गेटिड मॉनिटरिंग और मानक केयर टेस्ट का सुझाव देते हैं

हमारे जेनेटिक काउंसलर्स से मिलें!


पूजा रामचंद्रन
जेनेटिक काउंसलिंग डायरेक्टर

उन्होंने 2008 में जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया, तब से वह भारत में क्लिनिकल जेनेटिक काउंसलिंग के क्षेत्र में काम कर रही है. वह अपने क्षेत्र की एक जानी-मानी एक्सपर्ट है, वह देश की पहली ऐसी जेनेटिक काउंसलर है जिसके पास जेनेटिक काउंसलिंग में आधिकारिक डिग्री है और इस नाते वह देश में जेनेटिक काउंसलिंग प्रोफेशन को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

डॉ. ब्रताती चौधरी
सीनियर जेनेटिक काउंसलर

डॉ. ब्रताती चौधरी ने बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से Ph.D. की उपाधि प्राप्त की है, जिसके बाद उन्होंने IIIT हैदराबाद से पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप प्राप्त की. उनके पास जेनेटिक्स, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, साइटोजेनेटिक्स और मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स के क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक का टीचिंग और रिसर्च अनुभव है.

अनगोना साहा
जेनेटिक काउंसलर

अनगोना साहा, मैपमायजीनोम में जेनेटिक काउंसलर है. उन्हें पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों और नवजात और प्री-नेटल स्क्रीनिंग के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है. अनगोना ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से एप्लाईड जेनेटिक्स में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की है, इसके अलावा उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो से संबंधित डोमेन में सर्टिफिकेट प्रोग्राम पूरे किए हैं.

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